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सालभर से अधूरा स्कूल भवन, जर्जर भवन में पढ़ रहे नौनिहाल

पन्डा्मा में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, ग्रामीण बोले—“आज-कल शुरू होगा काम” सुनते-सुनते बीत गया एक साल

स्कूल भवन के साथ सड़क की बदहाली से भी ग्रामीण परेशान, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

कोरबा/पोड़़ी उपरोड़ा। विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत खिर्टी के पन्डा्मा गांव में स्कूली बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों के लिए नया स्कूल भवन बनाया जा रहा था, लेकिन निर्माण कार्य करीब एक वर्ष से अधूरा पड़ा हुआ है। ऐसे में बच्चों को पुराने जर्जर भवन में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर भवन की स्थिति को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। विशेषकर बारिश के मौसम में खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कूल भवन का तत्काल निरीक्षण कराकर बच्चों के लिए सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

निर्माण शुरू हुआ, लेकिन पूरा होने से पहले ही थम गया काम

ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल भवन का निर्माण तत्कालीन सचिव राजेश कुमार नायक के कार्यकाल में शुरू कराया गया था। बाद में उनके स्थानांतरण के बाद निर्माण कार्य कथित तौर पर रुक गया। तब से भवन अधूरा पड़ा है।

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही नया भवन तैयार हो जाएगा और बच्चों को जर्जर भवन से राहत मिलेगी। लेकिन समय बीतने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं हुआ।

अब ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अधूरे भवन को पूरा कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

“आज-कल शुरू होगा काम”… लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ

मामले में पूर्व सरपंच एवं वर्तमान सरपंच प्रतिनिधि श्री राय सिंह से जानकारी लिए जाने पर उन्होंने बताया कि सचिव राजेश नायक की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि “आज-कल में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।”

ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के आश्वासन लंबे समय से दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि भवन निर्माण पूरा करने की प्रक्रिया तय है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और इसे पूरा करने की निश्चित समयसीमा क्या है?

बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण चिंतित

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल का मामला महज एक भवन के निर्माण का विषय नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

उनका कहना है कि यदि वर्तमान भवन असुरक्षित है तो संबंधित विभाग को तत्काल इसकी जांच करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर अधूरे भवन, निर्माण की स्थिति और वर्तमान स्कूल भवन की सुरक्षा का निरीक्षण करें तथा जिम्मेदारी तय करते हुए निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाए।

बारिश में सड़क बनी परेशानी, आपात स्थिति में बढ़ती है चिंता

पन्डा्मा गांव में ग्रामीणों की दूसरी बड़ी समस्या आवागमन को लेकर है। ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दौरान गांव तक पहुंचने वाला रास्ता खराब हो जाता है, जिससे आवागमन प्रभावित होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ जाए या कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए तो एम्बुलेंस अथवा अन्य आपातकालीन वाहन को गांव तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।

उन्होंने स्कूल भवन के साथ-साथ गांव की सड़क और आवागमन व्यवस्था में भी सुधार की मांग की है।

अब आश्वासन नहीं, समाधान की मांग

पन्डा्मा के ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े इस मामले को अब और लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासन को मामले की जांच कराकर अधूरे स्कूल भवन को जल्द पूरा कराने की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।

बड़ा सवाल यही है—जब नया भवन बच्चों को सुरक्षित शिक्षा देने के लिए बनाया जा रहा था, तो वह करीब एक साल से अधूरा क्यों पड़ा है?

ग्रामीण अब “आज-कल” के आश्वासन के बजाय अधूरे भवन के पूरा होने और बच्चों को सुरक्षित विद्यालय मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

नोट: निर्माण कार्य, राशि, स्वीकृति और जिम्मेदारी से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज/विभागीय पक्ष सामने आने पर खबर को और अधिक तथ्यात्मक रूप से अपडेट किया जा सकता है।

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