
कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा के अटल परिसर में स्थापित भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर मामला अब गंभीर प्रशासनिक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर हुई जांच के बाद छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने शेष भुगतान पर तत्काल रोक लगाने और निर्धारित मानकों के अनुरूप नई प्रतिमा स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं।
यानी मामला अब सिर्फ “प्रतिमा कैसी बनी?” के सवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, अनुबंधीय शर्तों और जिम्मेदारी तक पहुंच चुका है।
जांच में सामने आई तकनीकी खामी
शासन के 14 अगस्त 2026 के पत्र के अनुसार, संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर की जांच रिपोर्ट क्रमांक 1087, दिनांक 29 जुलाई 2026 तथा संचालनालय के आदेश क्रमांक 5021, दिनांक 31 जुलाई 2026 के आधार पर मामले की समीक्षा की गई।
शासन स्तर पर परीक्षण के बाद पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि प्राथमिक जांच में प्रतिमा की गुणवत्ता निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
अब सवाल उठना लाजिमी है कि जिस कार्य में तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य था, वहां गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही?
“पहले गुणवत्ता, फिर भुगतान” — शासन का सख्त संदेश
मामले में शासन ने शेष देय राशि के भुगतान पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है।
निर्देश के मुताबिक प्रतिमा की गुणवत्ता, अनुबंधीय शर्तों के पालन और आवश्यक तकनीकी परीक्षण पूर्ण होने तथा सक्षम अधिकारी द्वारा संतोषजनक पाए जाने से पहले किसी भी प्रकार का अंतिम भुगतान नहीं किया जाना है।
यानी फिलहाल भुगतान की फाइल पर ब्रेक लग गया है।
अब नई प्रतिमा लगाने की कवायद
गुणवत्ता को लेकर जांच में सामने आए निष्कर्षों के बाद शासन ने नियमों के अनुसार नवीन प्रतिमा स्थापित करने की कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।
नई प्रतिमा के निर्माण एवं स्थापना से पहले उसके आकार, सामग्री, निर्माण गुणवत्ता और निर्धारित तकनीकी मानकों का सक्षम स्तर से परीक्षण एवं अनुमोदन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।
ठेकेदार की भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें
शासन के पत्र में संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध वैधानिक एवं अनुबंधीय कार्रवाई किए जाने के निर्देश हैं। हालांकि नियमानुसार कार्रवाई से पहले संबंधित अभिलेखों की जांच और ठेकेदार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना है।
जांच प्रतिवेदन में इस कार्य के संबंध में उप अभियंता चन्द्रप्रकाश जायसवाल को प्रथम दृष्टया उत्तरदायी प्रतिवेदित किए जाने का भी उल्लेख है।
अब सवाल सिर्फ प्रतिमा का नहीं, पूरी प्रक्रिया का
इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—प्रतिमा के निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी कैसे हुई? निर्धारित तकनीकी मानकों का परीक्षण किस स्तर पर किया गया? अब तक कितना भुगतान किया जा चुका है? और जिम्मेदारी आखिर किस स्तर पर तय होगी?
इन सवालों का अंतिम जवाब संबंधित विभागीय अभिलेखों और आगामी कार्रवाई से ही सामने आएगा।
शासन की चिट्ठी से साफ—मामला अब फाइलों से निकलकर कार्रवाई की दहलीज पर
अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भुगतान रोकने, नई प्रतिमा स्थापित करने और संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब निगाहें कटघोरा नगर पालिका की अगली कार्रवाई पर हैं। जांच की रिपोर्ट आ चुकी है, शासन के निर्देश जारी हो चुके हैं—अब देखना यह है कि कार्रवाई कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है।

