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पाली CHC में ₹5,500 का रहस्य! डिलीवरी मरीज से ब्लड के नाम पर कथित वसूली?

महिला का दावा—बिलासपुर से ब्लड मंगाने के नाम पर लिए ₹5,500; BMO अनिल सराफ बोले—कोरबा जिला अस्पताल से हो रही व्यवस्था!

कोरबा/पाली। सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंची एक डिलीवरी मरीज के परिजनों से ब्लड की व्यवस्था के नाम पर कथित रूप से ₹5,500 लिए जाने का मामला सामने आने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले में महिला की ओर से कथित तौर पर बयान दिया गया है कि उससे बिलासपुर से ब्लड मंगाने के नाम पर ₹5,500 की राशि ली गई।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

जब इस संबंध में पाली CHC के BMO अनिल सराफ से सवाल किया गया, तो उनका कथित जवाब महिला के दावे से अलग बताया गया। BMO के अनुसार कोरबा जिला अस्पताल से ब्लड की व्यवस्था की गई है और ब्लड आने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी।

बस यहीं से उठता है ₹5,500 का सबसे बड़ा सवाल!

अगर ब्लड कोरबा से आना था, तो बिलासपुर के नाम पर ₹5,500 क्यों?

अगर बिलासपुर से ब्लड मंगाया जा रहा था, तो कोरबा से व्यवस्था होने की बात क्यों?

₹5,500 किसने लिए और किसके निर्देश पर लिए?

क्या मरीज के परिजनों को इसकी अधिकृत रसीद दी गई?

राशि अस्पताल के किस खाते या मद में जमा हुई?


5 सवाल, जिनका जवाब अब जरूरी है!

1️⃣ ₹5,500 किस नियम के तहत लिए गए?

सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में मरीज से कथित रूप से इतनी राशि लेने का आधार क्या था?

2️⃣ बिलासपुर या कोरबा—ब्लड आया कहां से?

मरीज के परिजनों को बताई गई जानकारी और BMO के कथित जवाब में अंतर क्यों?

3️⃣ रसीद कहां है?

यदि ₹5,500 अधिकृत रूप से लिए गए, तो उसकी रसीद और भुगतान रिकॉर्ड सामने क्यों नहीं है?

4️⃣ पैसा किसके पास गया?

राशि किस कर्मचारी/व्यक्ति ने ली और किस मद में जमा की गई?

5️⃣ जांच कब होगी?

महिला के कथित बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कब शुरू करेगा?


मरीज परेशान, सिस्टम मौन?

डिलीवरी जैसी संवेदनशील स्थिति में जब परिवार अस्पताल पर भरोसा करके पहुंचता है, तब ब्लड की जरूरत बताकर हजारों रुपये लिए जाने का आरोप बेहद गंभीर विषय बन जाता है।

यहां सवाल सिर्फ ₹5,500 का नहीं है।

सवाल है—

मरीज को क्या जानकारी दी गई?

ब्लड वास्तव में कहां से मंगाया गया?

पैसे किस आधार पर लिए गए?

और पूरे मामले का रिकॉर्ड क्या कहता है?


BMO के जवाब ने बढ़ाया मामला!

मामले में BMO अनिल सराफ का कथित रूप से यह कहना कि ब्लड की व्यवस्था कोरबा जिला अस्पताल से की गई है, पूरे प्रकरण में एक नया सवाल खड़ा करता है।

यदि रिकॉर्ड में भी कोरबा जिला अस्पताल से ब्लड की व्यवस्था साबित होती है, तो फिर बिलासपुर से ब्लड मंगाने के नाम पर कथित रूप से ₹5,500 लिए जाने के आरोप की जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अब मौखिक जवाब नहीं—रिकॉर्ड चाहिए!

स्वास्थ्य विभाग को मरीज की केस हिस्ट्री, ब्लड रिक्विजिशन, संबंधित ब्लड बैंक रिकॉर्ड, अस्पताल रजिस्टर, भुगतान/रसीद और संबंधित कर्मचारियों के बयान की जांच करनी चाहिए।


₹5,500 का हिसाब कौन देगा?

पाली CHC में उठे सवालों का जवाब जांच से मिलेगा या फिर मामला दबा दिया जाएगा?

महिला का कथित बयान बनाम BMO का जवाब—अब सच सामने लाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है।

जनता पूछ रही है—

“ब्लड कहां से आया और ₹5,500 आखिर किस बात के लिए लिए गए?”

The Public Voice की नजर अब इस पूरे मामले की जांच और स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर रहेगी।

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