कटघोरा में खनिज विभाग की नाक के नीचे कथित अवैध मुरूम उत्खनन का खेल?
ग्राम कापूबहरा में कथित तौर पर धड़ल्ले से मुरूम उत्खनन-परिवहन का आरोप; मुरूम से लदा ट्रैक्टर रामलाल पटेल निवासी ललमटिया-लखनपुर का बताया जा रहा, खनिज प्रभारी प्रेम राजपूत के कथित जवाब ने बढ़ाई विभागीय जवाबदेही

कोरबा/कटघोरा। कटघोरा क्षेत्र के ग्राम कापूबहरा में कथित अवैध मुरूम उत्खनन और परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि क्षेत्र में मुरूम की खुदाई कर ट्रैक्टरों के माध्यम से उसका परिवहन किया जा रहा है। इसी बीच मुरूम से लदा एक ट्रैक्टर रामलाल पटेल, निवासी ललमटिया-लखनपुर का बताया जा रहा है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद पत्रकार साथी द्वारा कटघोरा खनिज विभाग के प्रभारी प्रेम राजपूत से संबंधित ट्रैक्टर और कथित मुरूम उत्खनन के संबंध में संपर्क किया गया। बातचीत के दौरान प्रभारी की ओर से कथित तौर पर कहा गया—
“रामलाल पटेल तो रेती में चलता था, मुरूम कब से स्टार्ट कर दिया?”
यही कथित जवाब अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सवाल यह नहीं कि ट्रैक्टर पहले रेती में चलता था, सवाल यह है—मुरूम वैध है या अवैध?
यदि विभागीय अधिकारी को संबंधित वाहन के पूर्व में रेती परिवहन में उपयोग होने की जानकारी थी, तो फिर यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि मुरूम परिवहन के समय वाहन के दस्तावेजों और मुरूम की वैधता की जांच की गई थी या नहीं?
और यदि विभाग को ग्राम कापूबहरा में कथित मुरूम उत्खनन की जानकारी नहीं थी, तो पत्रकार द्वारा सूचना दिए जाने के बाद मौके पर तत्काल जांच क्यों नहीं कराई गई?
यही वह बिंदु है, जहां से खनिज विभाग की निगरानी और कार्रवाई की वास्तविक परीक्षा शुरू होती है।
कापूबहरा में आखिर कौन कर रहा है मुरूम की खुदाई?
ग्राम कापूबहरा में कथित तौर पर मुरूम उत्खनन की सूचना सामने आने के बाद अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि मौके की जांच जरूरी है।
खनिज विभाग को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए—
- क्या संबंधित स्थान पर मुरूम उत्खनन की वैध अनुमति है?
- अनुमति किसके नाम पर है?
- स्वीकृत क्षेत्र और वास्तविक उत्खनन स्थल एक ही है या नहीं?
- उत्खनन की स्वीकृत मात्रा कितनी है?
- निकाली गई मुरूम की मात्रा कितनी है?
- मुरूम परिवहन करने वाले वाहन के पास वैध दस्तावेज हैं या नहीं?
- रॉयल्टी/ई-परमिट अथवा अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं?
- क्या विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया?
- यदि निरीक्षण किया गया, तो उसका पंचनामा अथवा जांच रिपोर्ट क्या कहती है?
सूचना मिलने के बाद विभाग ने क्या किया?
यह पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है।
पत्रकार द्वारा विभागीय प्रभारी को कथित मुरूम उत्खनन और संबंधित ट्रैक्टर की जानकारी दिए जाने के बाद—
क्या मौके पर टीम भेजी गई?
क्या ट्रैक्टर की जांच की गई?
क्या मुरूम के स्रोत की जांच की गई?
क्या उत्खनन स्थल का सीमांकन और निरीक्षण किया गया?
क्या कोई कार्रवाई अथवा जब्ती की गई?
अगर कार्रवाई हुई है तो विभाग को उसका विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। और यदि कार्रवाई नहीं हुई है, तो इसका कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
विभाग की चुप्पी से बढ़ रहे सवाल
खनिज संपदा से जुड़े मामलों में विभाग की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने का इंतजार करना नहीं, बल्कि अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी निगरानी रखना भी है।
ऐसे में ग्राम कापूबहरा की कथित घटना को लेकर अब जिला प्रशासन और वरिष्ठ खनिज अधिकारियों को संज्ञान लेकर स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।
यदि जांच में अवैध उत्खनन या परिवहन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार संबंधित व्यक्ति, वाहन और अन्य जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही सरकारी राजस्व की क्षति पाए जाने पर नियमानुसार वसूली भी की जानी चाहिए।
अब गेंद वरिष्ठ अधिकारियों के पाले में
ग्राम कापूबहरा में कथित मुरूम उत्खनन का मामला अब केवल एक ट्रैक्टर की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था और सूचना मिलने के बाद उसकी कार्रवाई पर भी है।
यदि सब कुछ वैध है तो दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
यदि अवैध उत्खनन मिला है तो कार्रवाई की जाए।
और यदि पत्रकार द्वारा सूचना दिए जाने के बाद जांच नहीं हुई है, तो यह भी बताया जाए कि आखिर क्यों?
The Public Voice का सीधा सवाल
ग्राम कापूबहरा में कथित मुरूम उत्खनन की सूचना मिलने के बाद खनिज विभाग ने मौके पर क्या कार्रवाई की?
क्या संबंधित ट्रैक्टर और उत्खनन स्थल की जांच हुई?
यदि जांच हुई तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?
और यदि जांच नहीं हुई, तो सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब जरूरत है बयान की नहीं, मौके की जांच और कार्रवाई की।


