कोरबा/पाली। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली की सामने आई तस्वीरें इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
अस्पताल के भीतर की तस्वीरों में गंदगी, फर्श पर जमा मैल-कचरा, दीवारों पर सीलन और कालेपन के निशान, जर्जर दरवाजे तथा खराब रखरखाव साफ नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहीं यदि ऐसी स्थिति बनी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

अस्पताल है या लापरवाही का आईना?
तस्वीरें सिर्फ गंदगी नहीं दिखा रहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
• यदि नियमित सफाई होती है तो गंदगी दिखाई क्यों दे रही है?
• यदि अधिकारियों का निरीक्षण होता है तो जर्जर दरवाजे और सीलन नजर क्यों नहीं आती?
• और यदि सब कुछ जिम्मेदारी से संचालित हो रहा है तो अस्पताल की यह तस्वीर सामने क्यों आ रही है?
इन सवालों का जवाब अब केवल अस्पताल प्रबंधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भी देना चाहिए।

जनहित के सवालों पर कथित तौर पर BMO का रवैया भी सवालों में
मामला केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं है। पाली CHC के BMO अनिल सराफ पर पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और जनहित के सवालों पर असहज रवैये के आरोप भी चर्चा में हैं।
पत्रकार जब अस्पताल की व्यवस्था, मरीजों की परेशानी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल पूछते हैं, तो उनसे सम्मानजनक व्यवहार और तथ्यात्मक जवाब अपेक्षित है।
अगर पत्रकारों के साथ वास्तव में कथित रूप से दुर्व्यवहार हुआ है, तो यह केवल पत्रकारिता का मुद्दा नहीं बल्कि जनता के सवालों को जवाब देने की प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी विषय है।

❓ BMO साहब से जनता के कुछ सीधे सवाल
• क्या CHC पाली की सफाई व्यवस्था से आप संतुष्ट हैं?
• क्या आपने स्वयं अस्पताल के शौचालय और अंदरूनी हिस्सों का निरीक्षण किया है?
• जर्जर दरवाजों और सीलन की मरम्मत कब होगी?
• सफाई व्यवस्था की निगरानी कौन करता है?
• और पत्रकारों द्वारा जनहित में सवाल पूछे जाने पर कथित दुर्व्यवहार की शिकायतों पर आपका क्या कहना है?

अब स्वास्थ्य विभाग करे “स्पॉट जांच”, सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं
मामले में जिला स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को CHC पाली का औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।
साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि:
• सफाई व्यवस्था के लिए कितने संसाधन/कर्मचारी उपलब्ध हैं।
• नियमित सफाई और निरीक्षण का रिकॉर्ड क्या है।
शौचालय एवं मरीजों के उपयोग वाले स्थानों की वास्तविक स्थिति क्या है।
• भवन एवं दरवाजों की मरम्मत की आवश्यकता के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
• पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार की शिकायतों में कितनी सच्चाई है।
लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई क्यों न की जाए।

The Public Voice का सीधा सवाल
• अस्पताल में मरीजों का इलाज होना चाहिए, व्यवस्था की बदहाली का नहीं।
• अगर तस्वीरें वर्तमान स्थिति को दर्शाती हैं, तो अब निरीक्षण कागजों पर नहीं, जमीन पर होना चाहिए।
जिला स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा?
• CHC पाली की सफाई व्यवस्था कब सुधरेगी?
और जनहित के सवाल पूछने वाले पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर जिम्मेदारी कब तय होगी?
अब देखना यह है कि खबर के बाद व्यवस्था सुधरती है या फिर तस्वीरें ही अधिकारियों को आईना दिखाती रहेंगी।
— THE PUBLIC VOICE | सत्य • निष्पक्ष • जनहित




