PM आवास पर भदौरा में मचा बवाल! पूर्व जनपद सदस्य के नाम ₹95 हजार भुगतान का दावा, GST Payment का भी उल्लेख—अब पात्रता पर उठे गंभीर सवाल
गुंजन राठौर के नाम PM आवास राशि जारी होने की शिकायत से गरमाया मामला, पति संतोष राठौर वर्तमान जनपद सदस्य; प्रशासन से दस्तावेजी जांच और पात्रता सत्यापन की मांग

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। ग्राम पंचायत भदौरा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सामने आई शिकायत ने पंचायत स्तर पर हलचल तेज कर दी है। शिकायत में पूर्व जनपद पंचायत सदस्य गुंजन राठौर का नाम सामने आने के साथ उनके नाम पर करीब ₹95 हजार PM आवास राशि के भुगतान का दावा किया गया है। इतना ही नहीं, शिकायत से जुड़े विवरण में GST Payment का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है। इन दावों ने अब योजना के लाभार्थी चयन, पात्रता और विभागीय सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले को इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि गुंजन राठौर पूर्व में जनपद पंचायत सदस्य रह चुकी हैं, जबकि उनके पति संतोष राठौर वर्तमान में जनपद पंचायत सदस्य हैं। ऐसे में शिकायत में सामने आए PM आवास भुगतान और GST Payment से जुड़े दावों की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
₹95 हजार भुगतान का दावा—आखिर किस आधार पर मिला लाभ?
शिकायत में गुंजन राठौर के नाम पर PM आवास योजना के तहत लगभग ₹95 हजार की राशि जारी होने का दावा किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित परिवार का नाम योजना की पात्रता सूची में किस आधार पर शामिल किया गया? लाभ स्वीकृत करने से पहले कौन-कौन से दस्तावेजों का सत्यापन किया गया? और क्या आर्थिक स्थिति एवं अन्य निर्धारित पात्रताओं की जांच नियमानुसार की गई थी?
यदि सरकारी रिकॉर्ड में वास्तव में यह भुगतान दर्ज है, तो उसके आधार और स्वीकृति प्रक्रिया को सार्वजनिक किए जाने की मांग उठना स्वाभाविक है।

GST Payment के उल्लेख ने बढ़ाई जांच की जरूरत
शिकायत में GST Payment का उल्लेख भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यही बिंदु अब मामले को और गंभीर बना रहा है। हालांकि केवल GST Payment का उल्लेख किसी व्यक्ति को PM आवास के लिए अपात्र साबित नहीं करता, लेकिन यदि ऐसे वित्तीय रिकॉर्ड मौजूद हैं तो उनकी प्रकृति, संबंधित व्यक्ति/व्यवसाय और PM आवास योजना की पात्रता से उनका कोई संबंध है या नहीं—यह प्रशासनिक जांच से स्पष्ट किया जा सकता है।
जनपद सदस्य दंपती होने के कारण बढ़ी पारदर्शिता की मांग
गुंजन राठौर के पूर्व जनपद सदस्य होने और संतोष राठौर के वर्तमान जनपद सदस्य होने के कारण मामला सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। सवाल यह नहीं है कि किसी जनप्रतिनिधि के परिवार को योजना का लाभ मिल सकता है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या लाभ निर्धारित सरकारी पात्रता और पारदर्शी सत्यापन के बाद दिया गया था?
यदि पात्रता पूरी थी और सभी नियमों के तहत लाभ मिला है तो सरकारी दस्तावेज इस पूरे विवाद को समाप्त कर सकते हैं। वहीं यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
अब प्रशासन से चाहिए सिर्फ एक जवाब—रिकॉर्ड क्या कहते हैं?
मामले में अब प्रशासन के सामने सबसे अहम जिम्मेदारी है कि शिकायत में लगाए गए दावों की दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए। PM आवास की स्वीकृति, लाभार्थी सूची, भुगतान की किस्तें, आवास की वर्तमान स्थिति, पात्रता संबंधी दस्तावेज, सत्यापन रिपोर्ट और GST Payment से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होने पर तस्वीर साफ हो सकती है।
आरोप सही हैं या गलत—इसका फैसला किसी राजनीतिक बयान या पंचायत की चर्चा से नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से होना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल:
क्या भदौरा में PM आवास का कथित ₹95 हजार भुगतान निर्धारित पात्रता और नियमानुसार सत्यापन के बाद हुआ था?
अब ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की नजर प्रशासन की जांच पर है। यदि रिकॉर्ड साफ हैं तो सवालों पर विराम लगेगा, और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी सामने आनी चाहिए।


