CG Forest Departmentकोरबाछत्तीसगढ़दुनियादेशराज्यलोकल न्यूज़

बरसघट्टी जंगल में कथित सैकड़ों पेड़ों की कटाई का मामला

तीन लोगों पर कार्रवाई का दावा, लेकिन कटे कितने पेड़? प्रजातियों का हिसाब क्या है? रेंजर बोले—“रजिस्टर देखकर बताऊंगा”

कार्रवाई के दावे के बीच वन नुकसान का आंकड़ा अब भी सवालों के घेरे में

कटघोरा/चैतमा। तेलसरा सर्किल अंतर्गत बरसघट्टी जंगल में कथित रूप से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला अब वन विभाग की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

मामले को लेकर जब हमारे पत्रकार साथी ने चैतमा वन परिक्षेत्र के रेंजर दिनेश कुर्रे से दूरभाष पर जानकारी लेने का प्रयास किया, तो रेंजर ने बताया कि मामले की जांच की जा चुकी है तथा PQR की कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को आरोपी के रूप में चिह्नांकित कर कार्रवाई की गई है।

लेकिन कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कुल कितने पेड़ काटे गए?

जब रेंजर से पूछा गया कि कटे हुए पेड़ों की संख्या कितनी है, कौन-कौन सी प्रजातियां प्रभावित हुईं और क्या इनमें बेशकीमती पेड़ भी शामिल हैं, तो रेंजर की ओर से कहा गया कि “मैं इतना याद थोड़ी रखता हूं, शाम को रजिस्टर देखकर जानकारी दे दिया जाएगा।”

यही जवाब अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बन गया है।


तीन आरोपियों पर कार्रवाई हो गई, लेकिन पेड़ों की संख्या का हिसाब?

अगर विभाग ने मामले की जांच पूरी कर ली है, तीन लोगों को चिह्नांकित कर कार्रवाई कर दी है और PQR की प्रक्रिया भी पूरी की गई है, तो फिर जांच से जुड़े बुनियादी आंकड़े स्पष्ट क्यों नहीं हैं?

आखिर विभागीय जांच में—

कितने पेड़ कटे?
कौन-कौन सी प्रजातियां थीं?
कटाई कितने क्षेत्र में हुई?
कितना वन नुकसान हुआ?
मौके पर क्या पाया गया?

इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड में होना चाहिए।

मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि कार्रवाई की जानकारी तो सामने आ गई, लेकिन कटे पेड़ों की संख्या और प्रजातियों का स्पष्ट आंकड़ा तत्काल उपलब्ध नहीं कराया जा सका।


❓ रेंजर से सीधे सवाल—“आखिर जंगल में कितना नुकसान हुआ?”

बरसघट्टी जंगल में यदि वास्तव में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है, तो वन विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि—

1. कुल कितने पेड़ काटे गए?

2. कितने पेड़ किस-किस प्रजाति के थे?

3. क्या किसी बेशकीमती प्रजाति के पेड़ की कटाई हुई?

4. कटाई किस बीट और किस क्षेत्र में हुई?

5. कटाई कब हुई और विभाग को इसकी जानकारी कब मिली?

6. मौके का निरीक्षण और पंचनामा कब तैयार किया गया?

7. तीन लोगों के विरुद्ध किस प्रावधान के तहत कार्रवाई की गई?

8. PQR में दर्ज कार्रवाई का पूरा विवरण क्या है?

9. काटे गए पेड़ों का विधिवत आकलन किस अधिकारी ने किया?

10. वन विभाग के रिकॉर्ड में कुल वन नुकसान कितना दर्ज है?


जंगल की रखवाली पर भी उठ रहे सवाल –

वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बीट स्तर से लेकर रेंज स्तर तक निगरानी और गश्ती व्यवस्था होती है।

ऐसे में यदि बरसघट्टी क्षेत्र में वास्तव में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि नियमित गश्त के दौरान विभागीय अमले को इसकी जानकारी कब हुई?

क्या संबंधित क्षेत्र का नियमित निरीक्षण हुआ था?

क्या गश्ती रजिस्टर में इस क्षेत्र का उल्लेख है?

अगर गश्त हुई थी तो कथित कटाई कब हुई?

और यदि कटाई लंबे समय से चल रही थी, तो विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

इन सवालों का जवाब भी विभागीय रिकॉर्ड से ही सामने आना चाहिए।


“रजिस्टर देखकर बताऊंगा” के बाद अब रिकॉर्ड पर नजर –

रेंजर द्वारा कटे पेड़ों की संख्या एवं अन्य जानकारी रजिस्टर देखकर उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

अब देखना यह है कि विभाग आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर कितने पेड़ों की कटाई, कौन-कौन सी प्रजातियां और कितना वन नुकसान होने की जानकारी सामने रखता है।

क्योंकि मामला अब सिर्फ तीन लोगों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है।

असल सवाल है—

“बरसघट्टी जंगल में आखिर कितना नुकसान हुआ और उस नुकसान का पूरा हिसाब वन विभाग के रिकॉर्ड में क्या दर्ज है?”


कार्रवाई हुई है तो पूरा हिसाब भी सामने आना चाहिए –

यदि विभाग ने जांच पूरी कर ली है और कार्रवाई भी कर दी है, तो अब जनता के सामने कार्रवाई का पूरा तथ्यात्मक विवरण आना चाहिए।

कितने पेड़?
कौन-सी प्रजाति?
कितना नुकसान?
कहां कटाई हुई?
कब जानकारी मिली?
किसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
PQR में क्या दर्ज है?

इन सवालों के जवाब जितने स्पष्ट होंगे, उतनी ही मामले में पारदर्शिता दिखाई देगी।


🎯 The Public Voice का सीधा सवाल

“जब तीन लोगों को चिह्नांकित कर कार्रवाई की जा चुकी है, तो बरसघट्टी जंगल में कटे पेड़ों की संख्या और प्रजातियों का पूरा हिसाब सामने आने में देरी क्यों?”

अब निगाह वन विभाग के अगले आधिकारिक जवाब पर है।

बरसघट्टी जंगल में हुई कथित कटाई की वास्तविक स्थिति, पेड़ों की संख्या, प्रजातियां और वन नुकसान का अंतिम तथ्य विभागीय रिकॉर्ड एवं जांच से ही स्पष्ट होगा।

नोट: रेंजर दिनेश कुर्रे से हुई बातचीत से संबंधित जानकारी हमारे पत्रकार साथी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना पर आधारित है। संबंधित तथ्यों की अंतिम पुष्टि विभागीय अभिलेख एवं जांच से होना शेष है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!