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कटघोरा पालिका में सियासी घमासान: अध्यक्ष राज जायसवाल के खिलाफ महिला पार्षद ने खोला मोर्चा

SP-कलेक्टर तक पहुंची शिकायत, भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने CMO को किया तलब; महिला सम्मान और वार्ड विकास को लेकर उठे गंभीर सवाल

कोरबा/कटघोरा। नगर पालिका परिषद कटघोरा में अध्यक्ष राज जायसवाल के खिलाफ वार्ड क्रमांक 01 की पार्षद श्रीमती राजेश्वरी जात्रा द्वारा की गई शिकायत के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्षद ने अध्यक्ष पर कथित तौर पर अभद्र व्यवहार, धमकी, वार्ड के विकास कार्यों में कथित भेदभाव तथा प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर उन्होंने पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब शिकायतकर्ता पार्षद ने अपनी पार्टी के भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्ष ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका के CMO से सीधे जानकारी ली और महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान तथा वार्ड विकास से जुड़े विषयों पर कड़ी नाराजगी जताई।

शिकायत से गरमाया राजनीतिक माहौल

शिकायतकर्ता पार्षद के अनुसार, वार्ड की विभिन्न जनसमस्याओं और विकास कार्यों को लेकर उनके द्वारा लगातार आवाज उठाई जा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ पालिका अध्यक्ष के केबिन में कथित रूप से अमर्यादित व्यवहार किया गया।

पार्षद का दावा है कि घटना के दौरान वहां अन्य लोग भी मौजूद थे और कथित व्यवहार से वे भावनात्मक रूप से आहत हुईं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पूरे मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

“तुम्हारे वार्ड में कोई काम नहीं होने दूंगा” — पार्षद का आरोप

शिकायत में पार्षद ने कथित तौर पर यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें कहा गया कि “तुम्हारे वार्ड में कोई काम नहीं होने दूंगा।”

यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो सवाल सिर्फ एक पार्षद के साथ व्यवहार का नहीं रहेगा, बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि के माध्यम से वार्ड की जनता तक विकास योजनाओं की समान पहुंच को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।

पार्षद का आरोप है कि उनके वार्ड में पानी, सड़क और स्वच्छता जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर लगातार मांग किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

वित्तीय स्वीकृतियों पर भी उठाए सवाल

शिकायत में पालिका अध्यक्ष पर कथित रूप से पसंदीदा वार्डों में विकास कार्यों के लिए वित्तीय स्वीकृतियों में भेदभाव करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पालिका के वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों की जांच कराने की मांग की है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वित्तीय अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार के आरोप अभी आरोप मात्र हैं; उनकी पुष्टि सक्षम जांच अथवा संबंधित दस्तावेजों से होना बाकी है।

महिला पार्षद के आरोपों से संगठन में भी हलचल

मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी के हस्तक्षेप को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, जिलाध्यक्ष ने मामले को गंभीरता से लेते हुए CMO से बात की और महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान तथा वार्ड के विकास कार्यों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया।

जिलाध्यक्ष की कथित नाराजगी के बाद अब स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल चर्चा में है कि शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई होती है।

SP और कलेक्टर के दरवाजे पर पहुंचा मामला

महिला पार्षद ने पुलिस अधीक्षक से कथित अभद्र व्यवहार और धमकी के मामले में वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। वहीं कलेक्टर से प्रशासनिक एवं वित्तीय आरोपों की निष्पक्ष जांच तथा वार्ड के लंबित विकास कार्यों को प्रारंभ कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि विरोध करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी गईं।

इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अब सबसे बड़ा सवाल—जांच होगी या मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा?

कटघोरा नगरपालिका का यह विवाद अब व्यक्तिगत मतभेद से आगे बढ़कर महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान, निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकार, वार्ड विकास में समानता और नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों में बदल गया है।

अब निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?

क्या नगरपालिका के वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों की पड़ताल होगी?

क्या कथित धमकियों और अभद्र व्यवहार की जांच के लिए उपलब्ध साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए जाएंगे?

और सबसे अहम—क्या वार्ड क्रमांक 01 के विकास कार्य राजनीतिक विवाद से अलग रखकर प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाए जाएंगे?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।

पार्षद की प्रमुख मांगें

SP से: कथित दुर्व्यवहार, धमकी एवं मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की जांच कर वैधानिक कार्रवाई।

कलेक्टर से: पालिका के प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णयों की निष्पक्ष जांच तथा वार्ड क्रमांक 01 के लंबित विकास कार्यों पर कार्रवाई।

भाजपा संगठन से: महिला जनप्रतिनिधि द्वारा उठाए गए आरोपों और शिकायत पर संगठनात्मक स्तर पर उचित संज्ञान।

फिलहाल मामला जांच और कार्रवाई की प्रतीक्षा में है। इस प्रकरण में पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना आवश्यक होगा, ताकि खबर के सभी पक्ष पाठकों के सामने निष्पक्ष रूप से रखे जा सकें।

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