
कोरबा/कटघोरा। नगर पालिका कटघोरा की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को लेकर पिछले करीब डेढ़ महीने से उठ रहे सवालों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। पालिका अध्यक्ष के बचाव में कांग्रेस नेताओं द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों पर कथित तौर पर ‘वसूली’ जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है।
प्रेस वार्ता में स्थानीय पत्रकारों की अपेक्षाकृत कम मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अधिकांश पत्रकारों ने कार्यक्रम से दूरी क्यों बनाई?
खबर गलत है तो दस्तावेज सामने क्यों नहीं?
नगर पालिका से जुड़े आरोपों पर सवाल उठाने के बजाय यदि मीडिया पर ‘वसूली’ का आरोप लगाया गया है, तो पत्रकारिता जगत का सीधा सवाल है—क्या इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण या दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं?
यदि प्रकाशित खबरें तथ्यहीन हैं, तो उनका तथ्यात्मक खंडन, आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज सामने रखे जा सकते हैं।
जनता के पैसे का मामला, जांच से परहेज क्यों?
मामला किसी दल विशेष की राजनीति से ज्यादा नगर पालिका के कामकाज और सार्वजनिक धन से जुड़े सवालों का है। ऐसे में निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है।
वहीं कांग्रेस नेताओं के पुराने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों का हवाला देते हुए अब राजनीतिक दोहरे मापदंड को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पूर्व में चर्चित ‘अटल परिसर’ मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष द्वारा कलेक्टर को दिए गए जांच संबंधी पत्र का हवाला देते हुए भी निष्पक्ष जांच की मांग चर्चा में है।
पत्रकारों को फंसाने की कथित साजिश की चर्चा
इधर सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि नगर पालिका से जुड़े मामलों को उठाने वाले कुछ पत्रकारों को कथित तौर पर झूठे मुकदमों, एट्रोसिटी जैसे गंभीर मामलों या हमले की साजिश में फंसाने की आशंका जताई गई है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि संभावित खतरे को लेकर कुछ पत्रकारों द्वारा पुलिस अधीक्षक तक सूचना पहुंचाई गई है। यदि ऐसा कोई आवेदन या शिकायत दी गई है तो उसकी निष्पक्ष जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
अब सवाल सीधा है—जवाब या जांच?
• आरोप गलत हैं तो दस्तावेज सामने आएं।
• खबर गलत है तो तथ्यात्मक खंडन किया जाए।
• मीडिया पर वसूली का आरोप है तो प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं।
• और यदि सब कुछ पारदर्शी है तो निष्पक्ष जांच से परहेज कैसा?
• कटघोरा में अब चर्चा प्रेस वार्ता से आगे बढ़कर जवाबदेही, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच पर आ गई है।

