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बालको के ‘ग्रीन बेल्ट’ पर बड़ा सवाल! 2.5 एकड़ में 48 हजार पौधे लगाने का दावा, RTI के आंकड़ों पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा। बालको (वेदांता) में हरित पट्टी और वृक्षारोपण को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला सचिव महावीर यादव ने बालको प्रबंधन द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के नाम पर प्रस्तुत किए गए आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठाते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB), कोरबा से तत्काल स्थल निरीक्षण और वैज्ञानिक जांच की मांग की है।

महावीर यादव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी को ज्ञापन-सह-चेतावनी पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया कि RTI से प्राप्त दस्तावेजों में दर्ज वृक्षारोपण के आंकड़े और वास्तविक जमीनी स्थिति का भौतिक सत्यापन बेहद जरूरी है।

2.5 एकड़ में 48 हजार पौधे—दावे ने खड़े किए कई सवाल

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अनुसार, बालको प्रबंधन की रिपोर्ट में वर्ष 2024-25 के दौरान प्लांट एवं टाउनशिप क्षेत्र की मात्र 2.5 एकड़ भूमि में 48,023 पौधे लगाए जाने तथा उनमें से 45,142 पौधों के जीवित रहने का दावा किया गया है।

यही आंकड़ा अब विवाद का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।

शिकायतकर्ता का सवाल है कि आखिर 2.5 एकड़ में इतने बड़े पैमाने पर पौधरोपण किस तरीके से किया गया? पौधों के बीच वास्तविक दूरी कितनी थी? किस प्रजाति के पौधे लगाए गए? उनका वर्तमान आकार क्या है? और सबसे अहम—मौके पर आज वास्तव में कितने पौधे मौजूद हैं?

पार्टी ने इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए मौके पर स्वतंत्र भौतिक सत्यापन की मांग की है।

तीन साल के आंकड़े, अब जमीन पर सत्यापन की मांग

शिकायत में बालको द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि—

  • 2022-23: 133 एकड़ क्षेत्र में 1,23,562 पौधे लगाने तथा 1,06,263 पौधों के जीवित रहने का दावा।
  • 2023-24: 81 एकड़ में 82,911 पौधे लगाने तथा 67,158 पौधों के जीवित रहने का दावा।
  • 2024-25: मात्र 2.5 एकड़ में 48,023 पौधे लगाने तथा 45,142 पौधों के जीवित रहने का दावा।

इन आंकड़ों को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने सवाल उठाया है कि क्या दस्तावेजों में दर्ज संख्या वास्तव में स्थल पर मौजूद पौधों से मेल खाती है?

राख बांधों में पौधों की ‘जीवितता’ पर भी सवाल

पार्टी ने बालको के Ash Dykes एवं BCPP क्षेत्र में बताए गए वृक्षारोपण पर भी सवाल उठाया है। महावीर यादव का आरोप है कि फ्लाई ऐश से प्रभावित क्षेत्रों में पौधों की वास्तविक जीवितता, मिट्टी की स्थिति, पौधों की आयु, ऊंचाई और तने के घेरे का वैज्ञानिक परीक्षण किए बिना केवल कागजी आंकड़ों के आधार पर सफलता का दावा करना उचित नहीं है।

हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण स्वतंत्र भौतिक एवं तकनीकी जांच के बाद ही किया जा सकता है।

33% ग्रीन बेल्ट के दावे पर भी उठे सवाल

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने औद्योगिक क्षेत्र में हरित पट्टी से संबंधित पर्यावरणीय प्रावधानों के पालन की भी जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि बालको परिसर में निर्धारित हरित क्षेत्र, बहु-स्तरीय वृक्ष संरचना और वास्तविक हरित आवरण की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

इसके लिए पार्टी ने केवल कागजी रिकॉर्ड के बजाय स्थल निरीक्षण, क्षेत्रफल सत्यापन और उपलब्ध सैटेलाइट इमेजरी के तुलनात्मक अध्ययन की मांग रखी है।

“गिनती कागजों की नहीं, जमीन पर पौधों की हो”

महावीर यादव ने कहा कि मामला किसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि बालको द्वारा प्रस्तुत आंकड़े सही हैं तो उनका मौके पर सत्यापन आसानी से हो सकता है, और यदि आंकड़ों में विसंगति है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों के साथ शिकायतकर्ता पक्ष की उपस्थिति में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए और जांच के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

क्या-क्या जांचने की मांग?

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने CECB के समक्ष मुख्य रूप से मांग की है कि—

1. तीनों वित्तीय वर्षों के सभी वृक्षारोपण स्थलों का संयुक्त स्थल निरीक्षण किया जाए।
2. मौके पर जीवित पौधों की वास्तविक संख्या का भौतिक सत्यापन किया जाए।
3. पौधों की प्रजाति, आयु, ऊंचाई एवं तने के घेरे का रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
4. संबंधित भूमि का क्षेत्रफल और वास्तविक पौधरोपण घनत्व मापा जाए।
5. उपलब्ध ऐतिहासिक सैटेलाइट इमेजरी/रिमोट सेंसिंग डेटा के माध्यम से हरित आवरण में हुए बदलाव का परीक्षण किया जाए।
6. राख बांध क्षेत्रों की मिट्टी एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
7. यदि जांच में दस्तावेजी आंकड़ों और जमीनी स्थिति में गंभीर अंतर पाया जाता है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए।
8. पूरी जांच की प्रमाणित रिपोर्ट शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।

15 दिन की मोहलत, फिर आंदोलन की चेतावनी

महावीर यादव ने CECB को चेतावनी देते हुए कहा है कि शिकायत प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर निष्पक्ष संयुक्त जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी द्वारा क्षेत्रीय पर्यावरण कार्यालय, कोरबा के सामने घेराव एवं तालाबंदी आंदोलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल पौधों की संख्या का नहीं, बल्कि पर्यावरणीय अनुपालन, सार्वजनिक जवाबदेही और औद्योगिक क्षेत्र में हरित आवरण की वास्तविक स्थिति से जुड़ा हुआ है।

अब बड़ा सवाल यही—कागजों में दर्ज हजारों पौधों का सच जमीन पर कितना?

बालको प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत आंकड़े और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता का अंतिम निर्धारण CECB की निष्पक्ष भौतिक एवं तकनीकी जांच से ही हो सकेगा। अब निगाहें पर्यावरण संरक्षण मंडल की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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